रत की सबसे युवा कार्ट रेसर अतीका मीर की प्रतिभा का डंका अब वैश्विक स्तर पर गूंजने लगा है। मोटरस्पोर्ट की वैश्विक संस्था एफआईए ने उनकी सराहना करते हुए कहा है कि भारत की 11 वर्षीय अतीका जैसे उभरते हुए सितारे इस खेल के भविष्य को एक नई दिशा दे रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा मान

जम्मू-कश्मीर की रहने वाली अतीका साल 2024 में फॉर्मूला 1 रेसिंग की प्रतिष्ठित 'एफ 1 एकेडमी' के 'डिस्कवर योर ड्राइव' प्रोग्राम के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय और एशियाई महिला ड्राइवर बनी थीं। इसके बाद से वह यूरोप में लगातार कार्टिंग प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और 12-14 आयु वर्ग में अपने से अधिक अनुभवी ड्राइवरों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। एफआईए ने भी उनकी सफलता को भारतीय मोटरस्पोर्ट के लिए एक उज्ज्वल भविष्य बताया है।

पिता से मिली प्रेरणा और शुरुआती सफर

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जन्मी अतीका के पिता आसिफ नजीर मीर खुद एक पूर्व रेसर रहे हैं और साल 2000 में भारत के पहले राष्ट्रीय कार्टिंग रेस विजेता बने थे। दुबई में तीन-चार साल की उम्र में अपने पिता को रेसिंग करते देख अतीका इस खेल की तरफ आकर्षित हुईं। उन्होंने पांच साल की उम्र में पहली बार एक मॉल में इलेक्ट्रिक कार्ट चलाई और उनके कौशल को देखकर पिता ने उनका औपचारिक प्रशिक्षण शुरू कराया।

एफ1 रेसर बनने का बड़ा सपना

अतीका ने साल 2021 में मात्र सात साल की उम्र में यूएई नेशनल चैंपियनशिप (बम्बिनो कैटेगरी) में भाग लेकर दूसरा स्थान हासिल किया था। उनका मुख्य सपना भविष्य में एफ1 रेसर बनना है (जोकि 1992 के बाद से कोई महिला नहीं बन पाई है)। इस सफर में उनके मेंटॉर भारत के पहले फॉर्मूला-1 ड्राइवर नारायण कार्तिकेयन हैं।