जयपुर SMS हॉस्पिटल आग से सबक क्यों नहीं, जयारोग्य अस्पताल में पुरानी वायरिंग दे रही हादसों को बुलावा
ग्वालियर: राजस्थान के जयपुर में सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में रविवार रात करीब 11 बजे आग लग गई. इस हादसे में 8 लोगों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया, लेकिन मध्य प्रदेश में भी हालात कुछ अलग नहीं है, ग्वालियर चंबल अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य अस्पताल समूह में भी इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी है. इसके बावजूद यहां मरीजों पर खतरे की तलवार लटकी रहती है.
जेएच के 3 अस्पतालों में आग की अलग-अलग घटनाएं
ग्वालियर में स्थित जयारोग्य अस्पताल समूह के तीन यूनिट कमलाराजा अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और हजार बिस्तर अस्पताल हर दिन हजारों मरीजों को इलाज मुहैया कराते हैं, लेकिन ये तीनों ही अस्पताल कई बार आग की घटनाओं से जूझते रहे हैं. हर बार अस्पताल प्रबंधन अग्निशमन व्यवस्थाएं तो दुरुस्त करता है, लेकिन करोड़ों खर्च होने के बाद भी इस तरह की घटनाएं अस्पताल की लाचार व्यवस्था की पोल खोल देती है.
अस्पताल में सबसे ज्यादा शॉर्ट सर्किट से लगती है आग
पिछले कुछ वर्षों में जयारोग्य अस्पताल समूह के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में हुई आग लगने की घटनाओं ने ना सिर्फ यहां भर्ती मरीजों की जान खतरे में डाली, बल्कि दो घटनाओं में 5 मरीजों ने अपनी जिंदगी भी गंवाई है. इन घटनाओं पर नजर डाले तो सुर्खियों में रही करीब आधा दर्जन घटनाएं शॉर्ट सर्किट
की वजह से घटित हुई हैं.
लेबर आईसीयू में फटा था एसी कंप्रेसर
वर्तमान की बात करें तो इस साल जेएच समूह में दो घटनाएं घटी हैं. पहली घटना 15 मार्च 2025 को सामने आई, जब कमला राजा अस्पताल के लेबर यूनिट में स्थित आईसीयू में लगाई एयर कंडीशन का कंप्रेसर फट गया था. इससे आग तेजी से फैली और आईसीयू में काफी नुकसान हुआ. जिस वक्त ये घटना घटी उस दौरान लेबर आईसीयू में 16 मरीज भर्ती थी. इसके अलावा अलग-अलग वार्डों से भी करीब 180 मरीजों को रेस्क्यू किया गया. गनीमत रही कि घटना के दौरान कोई जान हानि नहीं हुई.
कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू
कमला राजा अस्पताल ने इस घटना के बाद भी सबक नहीं लिया गया. यहां बीते 26 अप्रैल 2025 को एक बार फिर आग लगी. इस बार अस्पताल के दूसरे तल पर लगे एमसीबी बॉक्स में शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई. हालांकि घटना के दौरान मौके पर सिर्फ दो मरीज थे. अस्पताल स्टाफ ने सतर्कता दिखाते हुए 5 फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पा लिया.
आईसीयू में एसी ब्लास्ट
साल 2024 में दो घटनाएं घटी थी. 3 सितंबर 2024 को जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लगे एक एयर कंडीशन में धमाका हुआ था, जिसकी वजह से आग लग गई थी. जिसके बाद आनन-फानन में अटेंडेंस और स्टाफ ने मिलकर आईसीयू में भर्ती 15 मरीजों को बाहर निकाल कर उसकी जान बचाई थी. इस दौरान तीन मरीजों की मौत की खबर आई थी. ये हादसा भी शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ था. इस घटना में 3 बेड भी जले थे, लेकिन बाद में जेएच प्रबंधन मरीजों की मौत शिफ्टिंग की वजह से नहीं बल्कि अन्य कारणों से होना बताया था.
पीआईसीयू में नवजातों के बीच घटी थी घटना
8 दिसंबर 2024 को कमलाराजा अस्पताल के पीआईसीयू में भी शॉर्ट सर्किट की घटना हुई थी, जिससे नवजातों की जान खतरे में पड़ गई थी. पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) में जिस वक्त आग लगी थी, उस दौरान वाहन में 16 बच्चे भर्ती थे. हालांकि अग्निशमन यंत्र की मदद से आग को बुझा दिया गया था, अगर ये चिंगारी पास से गुजरी ऑक्सीजन लाइन तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था.
कोरोना काल में भी हुआ था हादसा
कोरोना के दौरान भी ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कोरोना आईसीयू में आग लगने की घटना सामने आई थी. अस्पताल के चौथे फ्लोर पर बनाए गए कोरोना आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से सीलिंग में आग लग गई थी. उस दौरान कोरोना आईसीयू में 9 मरीज इलाजरत थे. आग लगते ही मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया, लेकिन इसमें दो मरीज गंभीर रूप से झुलस गए थे. बाद में इलाज के दौरान प्रदीप नाम के मरीज की मौत हो गई थी.
आज क्या है अग्नि नियंत्रण के इंतजाम?
जेएच अस्पताल समूह के फायर ऑफिसर इंजीनियर प्रशांत धाकड़ ने बताया कि "जेएच अस्पताल समूह की सभी यूनिट्स में अग्नि नियंत्रण प्रणाली के लिए पर्याप्त व्यवस्था है. फायर हॉड्रेंट्स के साथ ही जगह-जगह कैपेसिटी के अनुसार फायर एक्सटिंग्विशर भी रखे हुए हैं, जिनकी सतत मॉनिटरिंग होती है. जिससे कहीं से भी अस्पताल में आग लगने जैसी घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके."
'अस्पतालों में फायर एक्सटिंग्विशर की पर्याप्त व्यवस्था'
जयारोग्य अस्पताल समूह के फायर ऑफिसर प्रशांत धाकड़ बताते हैं कि "सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में अग्निशमन के लिए पर्याप्त व्यवस्था हमने की है. अस्पताल में 80 से ज्यादा फायर एक्सटिंग्विशर तय स्थानों पर लगे हुए हैं. साथ ही 20 फायर एक्सटिंग्विशर सिलेंडर रिजर्व रखे जाते हैं. जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें रिप्लेस किया जा सके या उपयोग किया जा सके. ठीक इसी तरह, हजार बिस्तर अस्पताल में भी आग बुझाने वाले 350 सिलेंडर तय स्थानों पर उपलब्ध हैं. साथ ही 500 सिलेंडर रिजर्व में मौजूद हैं. इस मामले में कोई भी लापरवाही की गुंजाइश नहीं है."
बहरहाल इन हादसों में एक बात कॉमन थी कि कमलाराजा अस्पताल में आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आई, अस्पताल की यह बिल्डिंग पहले से ही काफी जर्जर हालत में हैं. ऊपर से यहां इलेक्ट्रिक वायरिंग भी बरसों पुरानी हो चुकी है. जिस वजह से आए दिन यहां शॉर्ट सर्किट की घटनाएं सामने आती रहती हैं. लेकिन इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद प्रबंधन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया. हालांकि इसके पीछे अस्पताल में मशीनों की वजह लाइट का बढ़ा लोड बताया गया और इसके लिए बिजली विभाग से लोड भी चेक कराया गया.

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