रतलाम: महाशिवरात्रि के महापर्व पर देश और प्रदेश के शिव मदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. ऐसे में रतलाम का प्रसिद्ध विरुपाक्ष महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. अब इस मंदिर को भी महालोक बनाए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. मालवा में अब शिव का तीसरा लोक बनने जा रहा है. उज्जैन के महाकाल लोक और मंदसौर के पशुपतिनाथ लोक की तर्ज पर रतलाम का प्रसिद्ध विरुपाक्ष महादेव मंदिर भी अब भव्य रूप में परिवर्तित होने जा रहा है.

सिंहस्थ के पहले तैयार होगा विरुपाक्ष महादेव लोक

विरुपाक्ष महादेव लोक बनाने के लिए प्रशासन ने पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है. इस प्रोजेक्ट के अनुसार मंदिर के आसपास स्थित अतिक्रमणों को स्थानीय प्रशासन ने हटा दिया है. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सिंहस्थ 2028 के पहले विरुपाक्ष महादेव लोक भी बनकर तैयार हो जाएगा. इसके बाद मालवा क्षेत्र में महाकाल लोक, पशुपतिनाथ लोक के साथ ही भगवान शिव के विरुपाक्ष लोक का दर्शन लाभ श्रद्धालु ले सकेंगे.

 

10 करोड़ की लागत से तैयार होगा विरुपाक्ष महादेव लोक

रतलाम के बिलपांक गांव में स्थित परमार कालीन विरुपाक्ष महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार और इस भव्य रूप देने के लिए स्थानीय लोगों के साथ, प्रशासन, एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप और सीएम डॉ मोहन यादव खुद रुचि ले रहे हैं. पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा 3 करोड़ 92 लाख रुपए की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई थी. जिसे पुरातत्व विभाग द्वारा संशोधित कर 6 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली गई है.मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल होने के बाद विरुपाक्ष महादेव लोक के लिए फिर से डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसमें करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से यहां भव्य विरुपाक्ष लोक के निर्माण की उम्मीद है. वहीं, एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप द्वारा पहले ही विरुपाक्ष महादेव मंदिर का भव्य स्वागत द्वार बनवा रहे हैं.

डूडा के परियोजना अधिकारी अरुण कुमार पाठक ने बताया कि "बिलपांक गांव में विरुपाक्ष महादेव मंदिर के स्वागत द्वार का कार्य लगभग पूर्ण होने को आया है. वहीं इसकी डीपीआर बनाने का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है."

 

भूल भुलैया वाले मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है यह मंदिर

बिलपांक गांव में स्थित भगवान विरुपाक्ष के इस मंदिर की प्रसिद्धि यहां स्थित खंबो की भूल भुलैया की वजह से है. वैसे तो इस मंदिर में 64 खंबे हैं. लेकिन इन्हें जब गिना जाता है तो कभी यह गिनती कम हो जाती है तो कभी ज्यादा. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भी मंदिर में पहुंच कर खंभों की गिनती करने का प्रयास जरूर करते हैं लेकिन उन्हें असफलता ही हाथ लगती है. लोग गिनती भूल जाते हैं इसलिए इसे भूल भुलैया वाला मंदिर भी कहते हैं.

 

महाशिवरात्रि पर लगता है मेला, बंटती है यज्ञ की खीर

विरुपाक्ष महादेव मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर एक विशेष यज्ञ का आयोजन किया जाता है. यज्ञ की पूर्णाहुति होने पर प्रसादी के रूप में वितरित की जाने वाली खीर का सेवन करने पर संतान प्राप्ति होती है. संतान प्राप्ति होने पर अगले वर्ष लोग अपनी मन्नत पूरी करने यहां पहुंचते हैं और मन्नत अनुसार बच्चों को मिठाई फल और अन्य सामग्री से तोलते हैं.मंदिर के पुजारी दुर्गा शंकर ओझा ने बताया कि "यह प्राचीन काल से ही चली आ रही परंपरा है. जिसमें यहां महाशिवरात्रि के दिन यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद प्रसाद की खीर बांटी जाती है."