स्कूल बस ड्राइवर की लापरवाही, गिरकर 10 मीटर तक घिसटी बच्ची की मौत
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के एत्मादपुर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया। नौ साल की मासूम नैना की जान स्कूल बस से गिरने के बाद चली गई। इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि जब नैना बस से गिरी, उस समय उसकी बड़ी बहन परी उसी बस में मौजूद थी और चालक से बार-बार अपनी बहन को बचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन चालक ने उसकी बात नहीं सुनी और बस आगे बढ़ा दी। नैना अपनी बड़ी बहन परी और छोटे भाई कान्हा के साथ रोज स्कूल जाया करती थी। उनके साथ ही चचेरी बहनें शिवानी, गौरी और तोरल तथा चचेरे भाई ध्रुव और चिराग भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं। हादसे के समय बस में मौजूद परी ने बताया कि जैसे ही नैना बस से नीचे गिरी, उसने तुरंत चालक को आवाज लगाई, जब उसने अपनी बहन को घायल हालत में सड़क पर पड़े देखा तो वह घबरा गई और जोर-जोर से रोने लगी। परी ने बताया कि नैना दर्द से तड़पते हुए उससे कह रही थी, दीदी मुझे बचा लो लेकिन बस चालक नरेंद्र सिंह ने बस नहीं रोकी और नैना को सड़क पर तड़पता छोड़कर आगे निकल गया। इस घटना के बाद से परी गहरे सदमे में है और अपनी छोटी बहन की मौत से टूट गई है। वहीं छोटा भाई कान्हा भी बहन को याद कर लगातार रो रहा है। हादसे के अगले दिन जब परिवार वालों ने नैना का स्कूल बैग खोला तो उसमें रखी उसकी कॉपियों और किताबों को देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। नैना पढ़ाई में काफी तेज थी और उसकी लिखावट भी बहुत सुंदर थी। उसकी अंग्रेजी, गणित और कला की कॉपियों में साफ-सुथरी हैंडराइटिंग दिखाई दी। कला की किताब में उसने कई सुंदर चित्र बनाए हुए थे। बैग में एक प्रार्थना पत्र भी मिला, जो उसने खुद अपने हाथों से स्कूल के प्रिंसिपल के नाम लिखा था। इसमें उसने बुखार होने के कारण छुट्टी देने का अनुरोध किया था। परिजनों ने बताया कि नैना का सपना था कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बने और अपने परिवार का नाम रोशन करे।
पुलिस के अनुसार, बस से गिरने के बाद नैना करीब 10 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई थी। इस दौरान बस का पहिया भी उसके ऊपर से गुजर गया। एत्मादपुर थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि नैना की मौत सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हुई। संभवतः बस से गिरते समय उसका सिर सड़क से टकराया, जिससे जानलेवा चोट लगी। घिसटने की वजह से उसके पूरे शरीर पर खरोंच के कई निशान पाए गए, हालांकि शरीर की किसी हड्डी के टूटने की पुष्टि नहीं हुई है। इस हादसे के बाद इलाके में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कई जगहों पर देखा जा रहा है कि छोटी ईको वैन में क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों को ठूंसकर स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है। कस्बों और गांवों में अक्सर एक छोटी वैन में 15 से 20 बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह बैठा दिया जाता है। कई चालक बच्चों को अपनी सीट के पास आगे बैठाकर ही वाहन चलाते हैं, जो बेहद खतरनाक है। फतेहाबाद और आसपास के इलाकों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां नियमों की अनदेखी करते हुए वैन में जरूरत से ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा है। इससे बच्चों को सांस लेने में भी परेशानी होती है और सड़क पर चलते समय हर पल बड़े हादसे का खतरा बना रहता है, जगनेर क्षेत्र में निजी स्कूलों की कई बसों में सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी मिली है। यहां कुछ बसें बिना परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। कई स्कूल वाहनों पर न तो स्कूल का नाम लिखा होता है और न ही जरूरी हेल्पलाइन नंबर। हालांकि सैंया विकास खंड के कुछ स्कूलों की बसों की स्थिति अन्य जगहों की तुलना में बेहतर पाई गई। यहां बसों में बच्चों को निर्धारित क्षमता के अनुसार बैठाया जा रहा था और अग्निशमन यंत्र भी लगे हुए थे। लेकिन इन बसों में भी फर्स्ट एड बॉक्स तो मौजूद थे, पर उनमें जरूरी दवाइयां, पट्टियां और मेडिकल किट नहीं थीं, जो किसी भी आपात स्थिति में बेहद जरूरी होती हैं। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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