बदलते मौसम ने बढ़ाई चिंता, ब्रिटेन में हीटवेव से 2,700 मौतें
लंदन। कभी अपनी सर्द और सुहावनी जलवायु के लिए विख्यात ब्रिटेन सहित उत्तरी यूरोप के देश इन दिनों भीषण और जानलेवा गर्मी की नई मार झेल रहे हैं। जिन यूरोपीय देशों में कभी एयर कंडीशनर (एसी) को एक फिजूलखर्ची या अनावश्यक वस्तु समझा जाता था, आज वही एसी लोगों की जान बचाने के लिए एक अनिवार्य जरूरत बन चुका है। पारे में लगातार हो रहे इस रिकॉर्ड तोड़ इजाफे ने जहां बाजार में कूलिंग सिस्टम की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है, वहीं गर्मी के कारण जान गंवाने वाले लोगों के आंकड़ों ने भी सरकारों को चिंता में डाल दिया है। एक ताजा वैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल मई और जून 2026 के महीनों में आई दो भीषण हीटवेव (लू) की चपेट में आने से इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 2,700 लोगों की असमय मौत होने की आशंका जताई गई है। पर्यावरण वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते आने वाले समय में यह संकट और अधिक भयानक रूप अख्तियार कर सकता है।
भीषण हीटवेव के आंकड़े और झुलसते घर
इस नए शोध के विवरण के अनुसार, 21 से 29 मई के बीच आए ग्रीष्म लहर के पहले दौर ने करीब 550 लोगों को मौत की नींद सुला दिया, जबकि 18 से 28 जून के बीच आए दूसरे और अधिक आक्रामक दौर ने तकरीबन 2,200 जिंदगियां लील लीं। इस अवधि में इंग्लैंड का पारा अप्रत्याशित रूप से मई में 35.1 डिग्री और जून में 37.7 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जिसने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मौसमी बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भविष्य का उत्तरी यूरोप आज के मुकाबले कहीं अधिक गर्म और शुष्क होने जा रहा है। दूसरी तरफ, जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने वाली एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने एक भयावह चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि बुनियादी ढांचे में तुरंत सुधार नहीं किए गए, तो वर्ष 2050 तक ब्रिटेन के लगभग 92 फीसदी घर रहने लायक नहीं बचेंगे और अत्यधिक गर्म हो जाएंगे। समिति ने प्रशासन से अस्पतालों, विद्यालयों और सरकारी भवनों में कूलिंग अरेंजमेंट को आधुनिक बनाने तथा दफ्तरों के लिए काम करने की एक अधिकतम तापमान सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया है।
खाड़ी देशों जैसी तपिश और बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर
इस साल पड़ी अभूतपूर्व गर्मी ने यूरोप के कई विकसित देशों को यह अहसास करा दिया है कि उनका वर्तमान बुनियादी ढांचा इस स्तर की तपिश का सामना करने में पूरी तरह अक्षम है। यही कारण है कि अब भविष्य के खतरों को भांपते हुए ट्रांसपोर्टेशन और पब्लिक यूटिलिटीज में बुनियादी बदलावों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसी कड़ी में लंदन, ब्रसेल्स और पेरिस जैसे महानगरों को आपस में जोड़ने वाली हाई-स्पीड अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा ने अपनी आगामी ट्रेनों की रूपरेखा को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया है। पूर्व में इन अत्याधुनिक ट्रेनों को अधिकतम 45 डिग्री सेल्सियस तापमान सहन करने की क्षमता के साथ डिजाइन किया जा रहा था, परंतु अब इन्हें खाड़ी देशों (जैसे सऊदी अरब) की तर्ज पर 55 डिग्री सेल्सियस की झुलसाने वाली गर्मी में भी सरपट दौड़ने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। इन नई ट्रेनों में ऐसे पावरफुल और आधुनिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम फिट किए जाएंगे, जो बाहर की भयंकर गर्मी में भी फेल न हों। यह नई रेल सेवा साल 2031 से पटरियों पर उतरेगी और आने वाले कई दशकों तक यूरोप की लाइफलाइन बनी रहेगी।

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