रायपुर-भिलाई में प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी, कई दस्तावेज जांच के घेरे में
रायपुर/भिलाई: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित CGPSC (लोक सेवा आयोग) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार तड़के एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमों ने एक साथ राजधानी रायपुर और इस्पात नगरी भिलाई में दबिश दी। मिली जानकारी के अनुसार, भिलाई के सेक्टर-10 स्थित सीजीपीएससी के पूर्व सचिव जेके ध्रुव के सरकारी और निजी ठिकानों पर सुबह से ही सघन छापेमारी की जा रही है। इसी के समानांतर, रायपुर में आयोग की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के आवास पर भी ईडी के अधिकारियों ने घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है।
सुबह 6 बजे चार वाहनों में पहुंची टीम, खंगाले जा रहे हैं डिजिटल दस्तावेज
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम बुधवार सुबह लगभग 6:00 बजे चार सफेद रंग की इनोवा गाड़ियों में सवार होकर भिलाई पहुंची थी। टीम ने सीधे सेक्टर-10 की स्ट्रीट नंबर-44 में स्थित जेके ध्रुव के घर को अपने घेरे में ले लिया। ईडी के अधिकारी घर के अंदर मौजूद तमाम वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, बैंक खातों की पासबुक, लॉकर की चाबियां, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और महत्वपूर्ण फाइलों को खंगाल रहे हैं। ठीक इसी तरह की कार्रवाई रायपुर में पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर पर भी चल रही है, जहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
पेपर लीक और अपनों को उपकृत करने का गंभीर आरोप
इस पूरे घोटाले की बैकग्राउंड कड़ियों को जोड़ते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पहले ही अपनी चार्जशीट और जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच के मुताबिक:
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इन प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रसूखदारों, राजनेताओं और अपने सगे-संबंधियों को नाजायज फायदा पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रिया के नियमों को ताक पर रख दिया।
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साल 2020 से लेकर 2022 के बीच आयोजित की गई राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक किए जाने के पुख्ता सबूत मिले हैं।
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आरोप है कि तत्कालीन आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने एक निजी औद्योगिक घराने (बजरंग पावर) से सीएसआर (CSR) फंड के नाम पर 45 लाख रुपये की मोटी रकम एक एनजीओ (NGO) के खाते में ट्रांसफर करवाई थी। इस एनजीओ की कमान सोनवानी की पत्नी के हाथों में थी, और इसी रिश्वत के एवज में परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए गए थे।
क्या है पूरा CGPSC विवाद?
यह पूरा विवाद तब सामने आया जब साल 2020 से 2022 के दौरान हुई राज्य सेवा परीक्षा के नतीजे घोषित हुए। इसमें डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे शीर्ष पदों पर तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के सगे रिश्तेदारों और कई वीआईपी (VIP) लोगों के करीबियों का एक साथ चयन हो गया, जिस पर प्रदेश भर के युवाओं ने भारी आक्रोश जताया था।
इसी धांधली को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन की सिफारिश पर सीबीआई ने 9 जुलाई 2024 को एक औपचारिक प्राथमिकी (RC1242024A0004) दर्ज की थी। इस मामले में सीबीआई पहले ही पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल को सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल साल 2021 की भर्ती प्रक्रिया में ही 1,29,206 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा (प्रिलिम्स) दी थी, जिनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा (मेन्स) तक पहुंचे। इनमें से 509 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया था और अंत में 170 पदों पर नियुक्तियां दी गई थीं, जिनमें अब बड़े स्तर पर हेरफेर की बात साबित हो रही है। इस ताजा ईडी रेड के बाद नई दिल्ली से लेकर रायपुर तक के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

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